Thursday, 21 April 2016

और एक बार फिर पृथ्वी को हरा-भरा रखने का लेंगें संकल्प

पर्यावरण को नहीं बचाया गया तो वह दिन दूर नहीं जब सब कुछ नष्ट हो जाएगा। इंन्सानी जिंदगी को बचाने और बनाने का एक मात्र उपाय है पर्यावरण को बचाना। इसके लिए हमें जी जान से कोशिश करनी होगी। ऐसे भाषण अक्सर संगोष्ठियों और नेता, अभिनेताओं के मुंह से सुनने को मिलते हैं। पर्यावरण को बचाने और संवारने के लिए सरकार के द्वारा भी बहुत से निर्देश दिए गए हैं। जहां तक बात करें शहर की तो जल्द ही शहर स्मार्ट होने की कगार पर है। चमचमाती सड़कें, पर्यटन स्थल और पार्किंग स्लोट। इस स्मार्ट होते शहर में कहीं ना कहीं हम पर्यावरण को धोखा दे रहे हैं।

दिन-रात हो रही कड़ी मेहनत से शहर को नया लुक देने की कोशिश की जा रही है। गाड़ियों और साइकिलों के लिए अलग-अलग रास्ते बनाएं जा रहे हैं। पर्यावरण की दृष्टि से इन सड़कों के बीच हजारों नए पौधे भी लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि 45 डिग्री तापमान में जहां इन्सान सूखे जा रहे हैं वहां यह सभी पौधे बड़े ही आसानी से जिंदा बचे रह सकते हैं। अपनी जिंदगी की शुरूआत कर रहे आठ इंच के इन पौधों को जहां शहर की सुन्दरता के लिए लगाया जा रहा है वहीं बगल में लगे 35 फुट बड़े और लगभग दस साल पुराने पेड़ को बेरहमी से काट भी दिया गया है।
शासन-प्रशासन से सहमति लेकर भले ही इस पेड़ को काटा गया हो लेकिन शहर के लोगों और चौराहे पर खड़ी ट्रेफिक पुलिस को छांव देने वाले इस पेड़ को भी शहर के सौन्दर्यीकरण होने का शिकार होना पड़ा है। जहां पेड़ों का समूह अपने साथी के कटने का दुख मनाएगा वहीं पृथ्वी दिवस पर एक बार फिर इंसान पेड़ को कटने से बचने और पर्यावरण बचाने का संकल्प लेंगें।

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