Wednesday, 15 January 2014

......“मिनम्मा, मेरी डिशनरी में इम्पॉसिबल का शब्द ही नहीं”.......


                बॉलीवुड मूवी की ये लाइन शायद आज हर बच्चे कि ज़ुबान पे होगी| आज कि इस 21वीं सदी में ये लाइन एकदम फिट बैठती है| आज के समय में दुनिया में कोई भी ऐसी चीज़ नहीं है जो मुमकिन ना हो|  हमारा भारत देश और पूरा संसार इतनी तेज़ी से आगे बढ़ गया है कि उसके लिए कोई भी काम नामुमकिन नहीं है| फिर चाहे वो बीमारी से जुडी कोई परिस्थिति हो या विज्ञान से जुडी, शिक्षा से जुडी हो या आस्था से|

                                   पहले के समय में हमारे बड़े हमसे कहा करते थे कि मेहनत से कुछ भी हासिल हो सकता है, हम किसी भी लक्ष्य तक पहुँच सकते है| वो साडी बाते आज के युग में सच होती सी नज़र आ रही है| आज जन्हा इन्सान चाँद पर झंडे गाड़ चुका है माँ के पेट से मनचाहा बच्चा भी पैदा करवा रहा है| जंहा इन्सानों ने रोबोट बनाकर खुद को साबित किया है वही न जाने कितनी लाइलाज बिमारियों के इलाज खोजे गए है|

       हमारा देश तरक्की और ऊंचाईयों कि उन बुलंदियों को छू रहा है जिसकी आज से 60-70 साल पहले कल्पना भी नहीं कि जा सकती थी|

                                      इतनी तरक्की और कामयाबी के बाद भी भारत में अभी भी कुछ ऐसे गाँव है जंहा लड़कियों कि भ्रूण हत्या कि जाती है, उन्हें पढने लिखने को मना किया जाता है, आज भी भारत में कितने ही लोग दो वक़्त कि रोटी को तरसते है| आज अमीर, और अमीर होता जा रहा है वही गरीब और गरीब होता जा रहा है|

                               क्या ऐसा नहीं हो सकता कि इस विज्ञान से भरी दुनिया में ऐसी मशीन का अविष्कार हो जो भूको को खाना दे, बेरोजगारों को रोज़गार दे और लड़कों के लिए लालची माँ बाप को बुद्धी दे???

                                     विज्ञान चाहे जितनी तरक्की कर ले मगर इस वक़्त उसके पास इनमे से किसी चीजों का इलाज नहीं|  

     

Wednesday, 1 January 2014

WELCOME 2014……………………..


देखते-देखते ये एक और साल बीत गया, साथ छोड़ गया कुछ खट्टी-मीठी यादें| साल के शुभ अवसर पर वैसे तो बत सिर्फ ख़ुशी और हंसी कि करनी चाहिए, बीते सालों में हुई तमाम उन चीजों को नज़र में लाना चाहिए जिनसे हमारे देश और समाज को लाभ मिला है| मगर बीता हुआ पिछला साल भी अपराध के नाम रहा| Crime against women, Murder case, Gang rape, Sexual harassment, Female infanticides, Sex selective abortion, Rape and sexual assault…….चाह कर भी हम कम नहीं कर पाए| हर साल कि तरह ये साल लोगो को ये बताने में बीत गया कि “लडकियाँ, लडकों के बराबर होती है, उनकी इज्ज़त करो, उन्हें माँ बहन का दर्जा दो” मगर फिर भी Crime against women, Gang rape दिन पे दिन बढ़ता चला गया|

                 खून, डकैती, चेन स्नेचिंग आदि मामलों से FIR रजिस्टर भरे पड़े है| इतनी जागरूकता और केम्पेन और तमाम कोशिश के बावजूद Female infanticides, Sex selective abortion जैसे मामले रुकने का नाम ही नहीं ले रहे है|

       इतनी सारी चीजों के बाद भी इस साल कुछ ऐसा हुआ जिससे हमारा देश आने वाले दिनों में प्रगति कि ऊचाई को छुएगा| जहाँ साल के अंत में दिल्ली गैंग रेप केस पर फैसला सुनाके निर्भया को इंसाफ दिलाया वही अन्ना के लोकपाल बिल के पास होते ही देश में भ्रस्टाचार के ख़त्म होने के 50% चान्स बढ़ गया|

       साल के अंत में ही दिल्ली में केजरीवाल कि सरकार ने आकर देश की जनता को ये दिखा दिया कि आम आदमी अगर चाहे तो कुछ भी नामुमकिन नहीं|

   2013 तो अपने साथ इतनी सारी यादें लेकर चला गया| आने वाले साल 2014 से हमें बहुत सारी उम्मीदें है|

           WELCOME 2014……………………………..