Saturday, 9 August 2014

यंहा के वातावरण में है शांति........
                                    भारत अपनी संस्कृती, तहज़ीब, एकता और वास्तुकलाओं के लिए जाने जाना वाला देश है| यंहा की हर प्राचीन इमारतों का इतिहास अपने में अनूठा है| सिर्फ प्राचीन ही नहीं भारत देश में कुछ ऐसी इमारते भी है जो कुछ दशकों पहले ही बनी है लेकिन उनपर की गयी कारीगरी आज भी चर्चा का विषय है| इन्ही में से एक है हैदराबाद में बना “बिरला मंदिर”|

                          1976 में बना ये मंदिर द्रेवेदियन, राज्य्स्थानी, और उत्कल तीन वास्तुकलाओं का अदभुत संगम है| मंदिर की इमारतों में इन तीनो कलाओं की झलकियाँ साफ देखी जा सकती है|  10 सालों में तैयार इस इमारत के निर्माण में लगभग दो हज़ार टन सफ़ेद मार्बल का इस्तेमाल किया गया है| हैदराबाद की नेकलेस रोड पे स्थित ये मंदिर ज़मीन से लगभग 280 फीट उपर पर स्थित है| मंदिर की बनावट का काम बिरला ग्रुप ने पूरा किया तथा इसी के नाम पर इस मंदिर का नाम बिरला मंदिर पड़ा|

                मंदिर की शुरुआत एक संकरी गली से होती है| जिसके दोनों तरफ फूल मालाओं से लेकर खाने की हर चीज़ अच्छे व सस्ते दामों में मिलती है| मंदिर का शुरुआती दरवाज़ा काफी बड़ा और सफ़ेद रंग के चमक से आने वाले श्रधालुओ का दिल से स्वागत करता है | मंदिर का दरवाज़ा हो या गुम्बद, सीढियाँ हो या दीवारे, सफ़ेद संगमरमर की चमक से पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठता है| बिरला मंदिर की कलाकृतियों में  सबसे आकर्षित है यंहा बनी “प्रभु वेंकटेश्वर” की प्रतिमा | काले संगमरमर से बनी इस मूर्ति की उचाई ग्यारह फुट है तथा इसी प्रतिमा के ठीक उपर बना छतरीनुमा कमल यहाँ आने वालों को और भी प्रभवित करता है| सिर्फ यही नहीं इस मंदिर में शिव, गणेश, हनुमान, लक्ष्मी, सरस्वती,और साईं बाबा की प्रतिमाये भी बनायीं गयी है| बिरला मंदिर का एक और कोना यंहा के अकर्ष्ण का केंद्र है जो यंहा आने वाले श्रध्लुओ को अपनी और खींचता है, और वो यंहा की सबसे ऊँची इमारत पे बनी छत|


                    यंहा की ऊंचाई पे खड़े होकर पूरे हैदराबाद शहर को आसानी से देखा जा सकता है| बिरला मंदिर ही एक मात्र ऐसी मंदिर है जो “मंदिर” होने के बावजूद यंहा एक भी घंटियाँ नहीं है| बिरला मंदिर का निर्माण सिर्फ ध्यान लगाने के लिए किया गया है| शायद एक यही कारण है की यंहा का माहौल एक दम शांत और स्वच्छ है| यंहा के वातावरण में इतनी शांति और हरियाली है की यंहा आकर मन और दिमाग एकांत में प्रफ्फुल हो जाता है | 

Saturday, 2 August 2014

   अब अपनी  
चिंताओं को कहिये अलविदा........


                                        कहते है स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है मगर यदि स्वस्थ मस्तिष्क ही न हो तो स्वस्थ शरीर का क्या फायदा?? इसी स्वस्थ शरीर को पाने के लिए ये बेहद आवश्यक है की अपने दिल और मन को शांत रखे | यूँ तो हर एक व्यक्ति के लिए सुकून ढूंढने का अपना एक अलग अंदाज़ होता है, किसी को घर छोड़ ऑफिस में सुकून मिलता है तो किसी को घर में, कोई दोस्तों के साथ सारे दुःख भूल जाता है तो कोई परिवार के साथ | दुनिया में कुछ लोग तो ऐसे भी है जिन्हें मन और दिमाग की शांति तब मिलती है जब वो अपने शहर के भीड़ और शोरगुल से निकलकर दुनिया के किसी शांत कोने में अकेले या परिवार के साथ अपना वक़्त बिताते है | यंहा मैं उन दीवानों की बात कर रही हू जिन्हें घूमना बेहद पसंद है| वो लोग  जिन्हें नयी-नयी जगहों पे जाना, नए-नए लोगो से मिलना तथा इस खुबसूरत सी दुनिया का चक्कर लगाना पसंद है |
                                        हफ्ते भर की भाग दौड़ के बाद सप्ताह का अंत अगर आप किसी ऐसी जगह बिताते है जंहा सिर्फ मन को शांति मिलती हो तो यकीन मानिये आपका आने वाला एक और सप्ताह सुकून भरा होगा| वैसे तो दुनिया में पर्यटन स्थल की कोई कमी नहीं है| बस तो अब आप तैयार हो जाईये इस खुबसूरत दुनिया की सैर के लिए|

                                                         “हैदराबाद, मेट्रो सिटी, यंहा जिंदगी लोगो से तेज़ दौडती है” ऐसी लाइन आपने अक्सर पढ़ी होंगी मगर हैदराबाद स्टेशन पर उतरते ही ये पंक्तियाँ सच हो जाती है| सुबह के आठ बजे हो या रात के ग्यारह, यंहा जीवन की रफ़्तार बहुत तेज़ है| हैदराबाद अपने नाईट लाइट्स के लिए काफी फेमस है| रात होते ही यंहा की हलचल भी बढ़ जाती है और सड़कों के किनारे बने होटल्स में लोगो की खासा भीड़ जमा होने लगती है| 

                         हैदराबाद, अपने तहज़ीब और चार-मिनार के लिए जाना जाने वाला शहर| जितना बड़ा ये शहर है उससे भी ज्यादा बड़ा इस शहर का दिल| आंध्र प्रदेश की मूसी नदी के किनारे बसा ये शहर हर साल लाखों से भी ज्यादा सैलानियों का तहे दिल से स्वागत करता है| इस शहर की आबो हवा में ना सिर्फ विदेशी बल्कि स्वदेशी सैलानी भी कुछ इस तरह बह जाते है की अपनी सारी मुश्किलों को भूल जाते है|
                                        1591 में बना चार मीनार, आज हैदराबाद का दिल कहा जाता है | शहर का सबसे बड़ा स्मारक होने के साथ ही यह देश के कुछ प्रसिद्ध, मशहूर और प्राचीन इमारतों का हिस्सा है| साथ-साथ यह पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है| यदि इस मज़्जिद का इतिहास खंगाले तो पता चलता है की सुल्तान मुहम्मद कुली क़ुतुब शाह, क़ुतुब शाही राजवंश के शासक ने इस मस्जिद को बनवाया था और उस वक़्त बने इसके मीनारों से आज भी पूरा शहर आसानी से देखा जा सकता है| कहा तो ऐसा भी जाता है की इसी चार मीनार में एक सुरंग भी है, जो प्राचीन काल के कैदीयों को भागने के उद्देश से बनायीं गयी थी मगर आज तक उस सुरंग का कोई निशान नहीं मिल पाया है|

       जिस तरह ये चार मीनार, हैदराबाद की जान है उसी तरह चार मीनार के इर्द-गिर्द ही लगने वाला “लाद बाज़ार” भी इस शहर की धडकनों में बसता है|
|घर की सजावट का सामान हो या “शरीर की सजावट” का इस बाज़ार में हर तरह का सामान उपलब्ध है| यहाँ की मोती और यहाँ के लैस तो वर्ल्ड फेमस है| लाद बाज़ार का रंग यूँ तो दिन में रहता ही है मगर रात होते-होते इस रंग में चमक बढती जाती है| चार मीनार की छत से ये नज़ारा ऐसा लगता है मनो आसमान में हजारों सितारे अपनी रौशनी से आकर्षित कर रहे हो| इस शहर की एक और चीज़ है जो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बहुत लोकप्रिय है और वो है यहाँ की “लज़ीज़ बिरयानी’| 


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  वेज से लेकर नॉन वेज तक हर तरह की स्वादिष्ट बिरयानियों के लिए जाना जाता है ये शहर| सिर्फ प्यार से पकाए गये खाने का स्वाद तब और बढ़ जाता है जब उसे प्यार से खिलाया भी जाये| और इस शहर की लाजवाब बिरयानी के स्वाद के पीछे यही एक राज़ है| यंहा की बिरयानी जितनी प्यार से बनाई जाती है उतनी ही प्यार से खिलाई भी जाती है|  तो अब देर किस बात की बांधिए आपना सामान और निकल चलिए एक ऐसे शहर की ओर जिसके अतीत की झलक आज भी यंहा दिखती है|