यंहा
के वातावरण में है शांति........
भारत अपनी संस्कृती, तहज़ीब, एकता और
वास्तुकलाओं के लिए जाने जाना वाला देश है| यंहा की हर प्राचीन इमारतों का इतिहास
अपने में अनूठा है| सिर्फ प्राचीन ही नहीं भारत देश में कुछ ऐसी इमारते भी है जो
कुछ दशकों पहले ही बनी है लेकिन उनपर की गयी कारीगरी आज भी चर्चा का विषय है|
इन्ही में से एक है हैदराबाद में बना “बिरला मंदिर”|
1976 में बना ये मंदिर
द्रेवेदियन, राज्य्स्थानी, और उत्कल तीन वास्तुकलाओं का अदभुत
संगम है| मंदिर की इमारतों में इन तीनो कलाओं की झलकियाँ साफ देखी जा सकती है| 10 सालों में तैयार इस इमारत के निर्माण में
लगभग दो हज़ार टन सफ़ेद मार्बल का इस्तेमाल किया गया है| हैदराबाद की नेकलेस रोड पे
स्थित ये मंदिर ज़मीन से लगभग 280 फीट उपर पर स्थित है| मंदिर की बनावट का काम बिरला
ग्रुप ने पूरा किया तथा इसी के नाम पर इस मंदिर का नाम बिरला मंदिर पड़ा|
मंदिर की शुरुआत एक संकरी गली से
होती है| जिसके दोनों तरफ फूल मालाओं से लेकर खाने की हर चीज़ अच्छे व सस्ते दामों में मिलती है|
मंदिर का शुरुआती दरवाज़ा काफी बड़ा और सफ़ेद रंग के चमक से आने वाले श्रधालुओ का दिल
से स्वागत करता है | मंदिर का दरवाज़ा हो या गुम्बद, सीढियाँ हो या दीवारे, सफ़ेद
संगमरमर की चमक से पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठता है| बिरला मंदिर की कलाकृतियों
में सबसे आकर्षित है यंहा बनी “प्रभु
वेंकटेश्वर” की प्रतिमा | काले संगमरमर से बनी इस मूर्ति की उचाई ग्यारह फुट है
तथा इसी प्रतिमा के ठीक उपर बना छतरीनुमा कमल यहाँ आने वालों को और भी प्रभवित
करता है| सिर्फ यही नहीं इस मंदिर में शिव, गणेश, हनुमान, लक्ष्मी, सरस्वती,और
साईं बाबा की प्रतिमाये भी बनायीं गयी है| बिरला मंदिर का एक और कोना यंहा के
अकर्ष्ण का केंद्र है जो यंहा आने वाले श्रध्लुओ को अपनी और खींचता है, और वो यंहा
की सबसे ऊँची इमारत पे बनी छत|
यंहा की ऊंचाई पे खड़े होकर पूरे हैदराबाद शहर को
आसानी से देखा जा सकता है| बिरला मंदिर ही एक मात्र ऐसी मंदिर है जो “मंदिर” होने
के बावजूद यंहा एक भी घंटियाँ नहीं है| बिरला मंदिर का निर्माण सिर्फ ध्यान लगाने
के लिए किया गया है| शायद एक यही कारण है की यंहा का माहौल एक दम शांत और स्वच्छ
है| यंहा के वातावरण में इतनी शांति और हरियाली है की यंहा आकर मन और दिमाग एकांत
में प्रफ्फुल हो जाता है |




