Friday, 17 April 2015

क्यूँ नेताजी की मौत आज भी है “इंडियाज़ बिगेस्ट कवर-अप’



भारत की आज़ादी में शरीक कई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी है जो बड़े ही शांत और कोमल तरीके से देश को आज़ादी दिलाने में लगे थे लेकिन उन्ही में से कुछ ऐसे भी थे जिनकी बोलियों में ही देश के प्रति सम्मान और देश के दुश्मनों के प्रति गुस्सा साफ़ झलकता था | ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों में सबसे पहला नाम है ‘नेताजी’ का |

 “आज़ाद हिन्द फौज” की स्थापना तथा ‘तुम मुझे खून दो और में तुम्हे आज़ादी दूंगा’ का नारा देने वाला ये व्यक्तित्व देश में अपनी एक मिसाल पैदा कर गया | लोगो को सिर्फ अपनी बात से प्रभावित करने वाला ये शख्स आज हमारे बीच तो नहीं है लेकिन आज भी इनकी मौत रहस्य के घेरे में है | आज आज़ादी के 70 दशक बाद भी इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है की नेता जी विमान हादसे के शिकार हुए थे या किसी साज़िश के | नेताजी की मौत के इन तमाम किस्सों और कहानियों के बीच 11 अप्रैल को एक और खुलासा सामने आया है | लेखक अनुज धर की किताब ‘इंडियाज़ बिगेस्ट कवर-अप’ में अब तक के सबसे बड़े खुलासे को बताया गया है |
लेखक अनुज धर ने अपनी इस किताब में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और कांग्रेस के सभी लीडरों पर ये आरोप लगाया है की ये सभी वर्तमान समय तक सच को छुपाते रहे है और नेताजी से जुड़े सभी मामलों को जनता के बीच पहुचने से रोकते रहे है | धर का कहना है की कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों में सिर्फ 41 दस्तावेजों को ही अब तक सार्वजनिक किया गया है जबकि बाकी बचे दस्तावेजों में नेताजी और नेताजी से जुड़े से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते है | इन्ही  सार्वजिक हुए दस्तावेजों में से मिली जानकारी के आधार पर ही लेखक अनुज धर ने कुछ खुलासे किये है | लेखक धर ने इस बात का आरोप लगाया है की ये तमाम कोंग्रेसी नेता सुभाष जी की मौत की साजिश में शामिल हो सकते है |इस खुलासे के साथ ही धर ने अपनी किताब में ये भी दावा किया है की ‘बंगाली दादा’ की मौत के दस दशकों बाद तक उनके परिवार वालों की जासूसी की जाती रही है | ताइवान के हवाई दुर्घटना के बाद (जस्टिस जी डी खोसला के रिपोर्ट के अनुसार) नेता जी की मौत हो गयी | जंहा लोगो को ये जानकर आश्चर्य होगा वही मौत के इतने दशकों बाद इस खुलासे से लोग अचम्भे में है की मौत के दो दशकों बाद तक नेता जी के परिवार की जासूसी होती रही है |

 नेताजी की मौत की कारवाही करने के लिए जिन दो समितियों का गठन किया गया था उन पर भी लेखक धर ने आरोप लगया है | 1956 में बनी शाह नवाज़ की समिति और 1970 में बनी जस्टिस जी डी खोसला कमीशन की समिति पर, अपनी किताब के मद्दयम से यह आरोप लगाया है की इन सभी समितियों ने और जितने भी गवाह, सुभाष जी की मौत के रहे है ज्यादातर वो सभी कांग्रेस की पार्टी से रहे है यही कर्ण है की इन सभी समितियों की रिपोर्ट कोंग्रेस से काफी प्रभावित रही है | इसी कारण इन सभी रिपोर्टो में कोई सच्चाई नहीं दिखाई गयी है | इन सभी समितियों के बाद भाजपा की भारत में जब सरकार आई तो वाजपेयी जी की सत्ता में एक बार फिर से एक समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष थे जस्टिस एम के मुखर्जी | बाजपेयी जी तो पांच साल बाद चले गए लेकिन जस्टिस मुखर्जी ने अपनी कारवाही जरी रखी | यूपीए के दुबारा सत्ता में आने पर प्रणव मुखर्जी डिफेंस मिनिस्टर बने और नेताजी के उन सात गवाहों में से एक होने के कारण उन्होंने हवाई हमले की बात जस्टिस मिखार्जी को बताई | लेखक धर ने आगे प्रणव दादा पर इस बात का भी आरोप लगाया है की 1995 में प्रणव मुखर्जी जापान गये थे वहा के फोरेन मिनिस्टर से मिलने जिसके बाद वो वही जापान में रहने वाली नेता जी की धर्मपत्नी से भी मिलने गए थे और तब उन्होंने मुखर्जी से मिलने को मन कर दिया था और ये भी कहा था की आप यहाँ दोबारा कभी न आयें |

इन सभी खुलासों से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का परिवार अभी तक सकते में है | उनके वंशज चंद्रकुमार बोस का कहना है की “ जासूसी उन लोगो की होती है, जो अपराधी होते है | या जिनका आतंकवादियों से वासता होता है | सुभाष बाबू और उनके परिजन भारत की आज़ादी से लड़े थे फिर उनकी जस्सोसी क्यों की गयी ?” हलाकि अख़बार में दिए एक इंटरव्यू में नेता जी की बेटी अनीता (73) का कहना है की “ हमारे परिवार की जासूसी की बात से मैं हेरान नहीं हूँ | जब में तीन साल की थी तब हमारे विईना के फ्लैट में एक भारतीय अधिकारी, ब्रिटिश ख़ुफ़िया विभाग के अफसरों के साथ आये थे | माँ से कुछ सवाल किये थे | तब मेरी माँ ने उनसे देश के गद्धारों की बात कही थी जिसे सुनके उस अफसर का चेहरा लाल हो गया था |

तो क्या सुभाष जी बन सकते थे नेहरु से बड़े नेता?

नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस के निधन के बाद 1948 से 1968 तक उनके घरवालों की जासूसी कराइ गयी थी | इस दौरान लगभग दो दशक 16 सालों तक पंडित जवाहरलाल नेहरु आज़ाद देश के प्रधानमंत्री बने रहे | आईबी के प्रमुख सीधे उन्हें ही रिपोर्ट करते रहे | इन सभी बातों से ये समझा जा सकता है की नेता जी की मौत से सम्बंधित साड़ी जानकारियां सीधे-सीधे नेहरु जी को ही मिलती रही | इन सभी खुलासों ने देश के सामने कुछ महत्वपूर्ण सवाल लाकर खड़े कर दिए है | आखिर कैसे हुई सुभाष जी की मौत? क्यों नेता जी की मौत के बाद भी उनके परिवार वालों की जासूसी होती रही? और और अगर ये साड़ी बाते सच है तो पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने क्यों नहीं किया कोई कारवाही? 
         

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